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Showing posts from January, 2019

Essay on Pongal in Hindi | पोंगल पर निबंध

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Essay on Pongal in Hindi | पोंगल पर निबंध 



Essay on Pongal in Hindi Language पोंगल दक्षिण भारत मुख्य रूप से तमिलनाडु का सबसे लोकप्रिय और प्रमुख त्यौहार है। तमिल भाषा में पोंगल का अर्थ होता है विप्लव व उफान इस त्योहार को पोंगल इसलिए कहते हैं क्योंकि इस दिन सूर्य की पूजा होती है और सूर्य को जो प्रसाद अर्पित किया जाता है उसे अच्छी तरह उबाला जाता है। दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है पोंगल का त्यौहार जहां उत्तर भारत में मकर संक्रांति धूमधाम से मनाई जाती है वहीं दक्षिण भारत में खासतौर पर तमिलनाडु में हिंदू लोग धूमधाम से पोंगल का त्यौहार बनाते हैं लगभग 4 दिनों तक चलने वाला यह पर्व मुख्य रूप से खेती का पर्व होता है। इश्क त्यौहार के दौरान सूर्य की उपासना होती है पोंगल सूरज के दक्षिणायन से उत्तरायण होने का प्रतीक होता है। तमिलनाडु मे लोग फसल के इस पर्व को उत्साह के साथ मनाते है।

पारंपरिक रूप से पोंगल का त्यौहार धान की फसल को घर लाने की खुशी प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है । पोंगल तमिल महीने की 1 तारीख को यानि  जनवरी के मध्य में मनाया जाता है पोंगल से पहले घरों की साफ-सफाई की जाती है…

Essay on Lohri in Hindi | लोहड़ी पर निबंध

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Essay on Lohri in Hindi | लोहड़ी पर निबंध 

लोहड़ी नाम 'लोही' शब्द से बना है जिसका अर्थ है फ़सलों का आना और बारिश का आना। लोहड़ी पर्व फ़सलों का बढना तथा कई इतिहासिक घटनाओं से जुड़ा है। लोहड़ी का पर्व ख़ास तौर से पंजाब प्रांत में बड़ी ही धूम -धाम से मनाया जाता है।
लोहड़ी माघ महीने की संक्रांति से पहली रात को मनाया जाता है। यहां कई दिन पूर्व ही लोहड़ी को मनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पुराने समय में लडके -लडकियां इकट्ठे मिलकर घर -घर गीत गाते हुए लोहड़ी मांगते थे, घर के लोग उन्हें रेवड़ियां और मूंगफली आदि देकर विदा करते थे। लोहड़ी से कई दिन पूर्व ही बाज़ारों में रौनक लगनी शुरू हो जाती है हर तरफ रेवड़ियां, गचक और मूंगफली और सजावट आदि के समान की दुकाने सजने लगती हैं। लोहड़ी वाले दिन लोग अपने घर में साग और मक्की की रोटी बनाते हैं और गन्ने के रस की खीर बनाना भी शुभ माना गया है। पंजाब में लोहड़ी के दिन कुँवारी लडकियां नए –नए कपड़े पहनकर लोहड़ी मांगने जाती हैं और यह गीत गाकर लोहड़ी मांगती हैं
"दे माई लोहड़ी , तेरी जीवे जोड़ी"
इसके इलावा गली –मुहल्ले के छोटे –छोटे बच्चे घर –घर जाकर उपले मांगते हैं…

Essay on Monkey in Hindi | बन्दर पर निबंध

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Essay on Monkey in Hindi | बन्दर पर निबंध बंदरी का शरारती स्वभाव का जानवर होता है इसे उछलना कूदना बेहद पसंद होता है अक्सर आपने इन्हें एक पेड़ से दूसरे पेड़ ऊपर उछलते कूदते हुए देखा होगा यह पलक झपकते ही एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर चले जाते हैं। संसार में दो तरह के बंदर पाए जाते हैं एक बंदर जो एशिया में पाए जाते हैं और दूसरे बन्दर जो दक्षिण अफ्रीका में पाए  जाते हैं। बंदरों को ज्यादातर पेड़ों , पहाड़ो घास के मैदानों में और घरों की छतों पर रहना बेहद पसंद होता है। इसके अलावा जंगलों और चिड़ियाघर में भी विभिन्न प्रकार के बंदर देखने को मिल जाते हैं। एशिया में पाए जाने वाले बंदरों के 32 दांत होते हैं जबकि दक्षिण अफ़्रीका के बंदरों में 36 दांत होते हैं। बंदर एक उछल कूद करने वाला जानवर होता है वह अपना भोजन एक पेड़ से दुसरे पेड़ पर उछलते और कूदते हुए ही ढूंढ लेता है इसे पेड़ों पर रहना अधिक पसंद होता है क्योंकि यह वृक्षों पर खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं।
बंदर का जीवन काल : बंदर की औसतन आयु 15 से लेकर 30 वर्षों तक होती है किंतु इन की कुछ ऐसी प्रजातियां भी है जिनकी उम्र इससे कुछ ज्यादा जा कम भी हो …

10 Lines on Monkey in Hindi

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10 Lines on Monkey in Hindi




बन्दर को मानव का पूर्वज माना गया है 98 फीसदी मानव और बन्दर का डीएनए आपस में मिलता जुलता है .
2.मंकी को गिनती करना सिखाया जा सकता है .
3.बंदरों के समूह को अंग्रेजी भाषा में ट्रूप कहा जाता है .
4.बन्दर ज्यादातर वृक्षों पर ही रहते हैं .
5.यह एक बुद्धिमान जानवर है जो केला हमेशा छीलकर खाता है .
6.एक सामन्य बन्दर की आयु 15 से लेकर 25 वर्षों तक होती है .
7.बन्दर अपने अगले पैरों को हाथ की तरह इस्तेमाल करता है .
8.मंकी नकल उतारने में बहुत माहिर होते हैं .
9.यह झुण्ड में रहना पसंद करते हैं इस झुण्ड का एक मुखिया भी होता है
10.संसारभर में बंदरों की सैंकड़ों प्रजातियाँ पायी जाती हैं
11.कुछ बंदरों की प्रजातियां शाकाहारी जबकि कुछ मांसहारी होती हैं
12.बन्दर एक एक पेड़ से दुसरे पेड़ पर आसानी से कूद सकते हैं






Poem on Bharat in Hindi | भारत पर कविता

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Poem on Bharat in Hindi | भारत पर कविता 

देश हमारा भारत है 
जिसका में वंदन करता हूं 
आप सभी का 
अपनी कविता में 
हार्दिक अभिनंदन करता हूं 
देख के भारत की पीड़ा को 
लगता है कुरुक्षेत्र बनू 
जहां भस्म हो पापी सारे 
में क्रोधी त्रिनेत्र बनूं 
यहां रेप, हिंसा और दंगा 
कुछ मानव का चंदन हैं 
गूंज रहा 
हर ओर हमेशा 
लाचारों का क्रन्द्र है 
सत्ता लोभी नेताओं के 
हाथों में सरताज हुआ 
सब नेताओं के हाथ धुले हैं 
हिंसा के साबुनों से 
जहां न्याय देने वाले खुद 
न्याय मांगते मग -मग में 
क्यों फिर देश ठोकर न खाए 
प्रगति राह के पग -पग में 
देश के वीर शहीदों के 
चरणों का पावन धूल बनूं 
देख के भारत की पीड़ा को 
खुशबु से भरा फूल बनूं 

: उमाकांत सुर्याशी

Poem on India in Hindi -


Poem on banyan tree in Hindi | बरगद पर कविता

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Poem on banyan tree in Hindi | बरगद पर कविता 


चलो सुस्ता लें बरगद की छांव में दादा ने ही लगाई थी अपने ही गाँव में वे कहते थे हमें जब छोटा था तब लाया था बरगद को जंगल से निकाल कर मां ने गुस्से में खूब डांट लगाई थी
में खूब रोया था में यह सब देखकर तनिक न रह पायी थी वह भी रोते -रोते बरगद को
घर के पीछे लगवाई थी कड़ी मेहनत के बाद बड़ा हो गया बरगद धुप की लाल शोलों से बचाता है अब वह बरगद बरगद की छांव में अब लोगसुस्ताते हैं शुद्ध -शुद्ध हवाओं से काम होता है अब रोग दादा तो अब नहीं रहे रहा बरगद ही निशानी जाते -जाते दादा जी ने सुनाई हमको यह कहानी।
: मुनटुन राज

Poem on Forest in Hindi | जंगल पर कविता

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Poem on Forest in Hindi | जंगल पर कविता 




में अपने भीतर छोड़ आयी 
एक पूरा भरा जंगल 
जहां तहां रोड़ा बनते 
वृक्ष विस्तार लिए 
कटे ठूंठ 

सूखे पत्तों का शोर 
शिकारी की मचान 
रोबदार शब्दों की चुभन 
जड़ों का रोना 

रोम विहीन त्वचा पर 
अमर बेल सा 
नहीं लिपटना अब 
जंगल थे 
जंगल ही रह गए तुम 


मैं कोई वन देवी नहीं 
हाड -मांस का टुकड़ा भी नहीं 
एक ह्रदय पिंड हूं 
जो सिर्फ साँसे ही नहीं भर्ती 
हंस भी सकती है 
नाच भी सकती है 
चीख भी सकती है 
और अब गुर्रा भी सकती है। 

Thanks : मीता दास 

Short Poem on Dahej Pratha in Hindi | दहेज़ प्रथा पर निबंध

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Short Poem on Dahej Pratha in Hindi | दहेज़ प्रथा पर निबंध

नहीं रहेंगे अब वे दिन 
मिटेगी जल्द दहेज के दिन 
अपने घर को भरने की खातिर 
दुसरे के घर को उजाड़ना 
कहां बहादुरी है 

एक बेटी के पिता की जिंदगी 
पैसे जोड़ते हुए गुजर जाती है 
दहेज़ प्रथा हमें अंदर तक तडपाती है 

उठ रही है आवाज़ 
हटेगी यह दहेज़ प्रथा 
आयेगी हमारी खुशियों को बारी 
फिर न लगेगी बेटियां 
किसी बापू को भारी 
अब हवा से जमीन तक 
बेटियां उड़ रहीं हैं 
आजादी की ओर बढ़ रहीं है 
- अंशु अवनिजा 




Short Poem on My School in Hindi | मेरा स्कूल पर कविता

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Short Poem on My School in Hindi | मेरा स्कूल पर कविता 


यह मेरा प्यारा स्कूल 
नहीं सकता में इसको भूल 
मां ने मुझको जन्म दिया 
और दिया ढेर सारा प्यार 
स्कूल ने 
मेरा ज्ञान बढ़ाकर 
मेरा जीवन दिया संवार 
खूब खेलो और पढ़ो तुम 
कहती यह टीचर हमारी 

बड़े होकर प्रण तुम करना 
देश की सेवा करेंगे मिलकर 
कोई वकील कोई देश का नेता 
कोई डॉक्टर, कोई इंजीनियर होगा 

भारत विश्व में बनेगा अव्वल 
हर कोई जब शिक्षित होगा 
यह मेरा प्यारा स्कूल
नहीं सकता में इसको भूल 

देवेंद्र राज सुथार 

Essay on New Year in Hindi | नव वर्ष पर निबंध

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Essay on New Year in Hindi : नव वर्ष पर निबंध 
नववर्ष की शुरुआत का दिन उसे माना गया है जहां पर पृथ्वी अपने सोलर पथ पर सूर्य की एक परिक्रमा पूरी कर लेती है इसके बाद 1 जनवरी से वह नई शुरुआत करती है इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसे नए साल की शुरुआत माना गया है अगर पृथ्वी के सोलर रूट को देखा जाए तो ऐसा अंडाकार पथ पर कौन सी जगह जाकर पृथ्वी का एक चक्कर पूरा माना जाए यह तय करना भी कोई आसान काम नहीं था इसलिए इसे निर्धारित करने के लिए सिर्फ विज्ञान का सहारा नहीं लिया गया बल्कि लोगों की धार्मिक मान्यताओं तत्कालीन शासकों की इच्छा शक्ति मौसम में नियमित तौर पर होने वाले बदलाव और एस्ट्रोनॉमी को भी शामिल किया गया है यही वजह रही कि जनवरी को साल की शुरुआत माना गया।
इस तरह माना गया है पहला दिन वर्ष 1570 के दशक में पॉप ग्रेगरी ग्रोगोरियन कैलेंडर को लेकर आए जिसमें उन्होंने जनवरी को साल का पहला महीना माना था तब से एक जनवरी को साल का पहला दिन मनाने का चलन शुरू हुआ हालांकि इंग्लैंड ने इस कैलेंडर को वर्ष 1772 तक मान्यता प्रदान नहीं की थी वर्षा 1772 तक इंग्लैंड ही नहीं अमेरिकी देशों में भी 25 मार्च को साल का पहल…